शीर्षक:– ज्ञान का सागर
शिक्षक वह बाती जो जलती है परमारथ के कारण ,
शिक्षक पथ प्रदर्शक जोकि ज्ञान का करते संचारण।
शिक्षक ही डूबी कश्ती को पार लगाने वाले हैं,
शिक्षक ही हमको जीवन का सार सिखाने वाले हैं।
विद्या के भंडार ग्रह की चाबी होते हैं शिक्षक,
अंधेरों के काल पुंज पर हावी होते हैं शिक्षक,
शिक्षक मानव जीवन में गागर में सागर होते हैं,
शिक्षक शिष्य के जीवन में भगवान बराबर होते हैं।
सहिष्णुता का ज्ञान कराने वाले होते हैं शिक्षक,
अनुशासन का ज्ञान कराने वाले होते हैं शिक्षक ,
शिक्षक हमको क्षमा धर्म का पाठ सिखाने वाले हैं,
शिक्षक हमको जीवन का उद्देश्य दिखाने वाले हैं।
भेदभाव की दीवारों को तोड़ने वाले हैं शिक्षक,
अंधकार के तूफानों को मोड़ने वाले हैं शिक्षक ,
शिक्षक अपने उद्यम से उत्थान राष्ट्र का करते हैं
शिक्षक ही शिक्षा देकर कल्याण राष्ट का करते हैं ।
मैं होता हूं कलमकार शिक्षक का वंदन करता हूं,
शब्दों की माला लेकर उनका अभिनंदन करता हूं ।।
रचनाकार: – सोनू मीना
पता :– रायसेन मप्र

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