बुधवार, 26 नवंबर 2025

पत्ता गोभी की सब्ज़ी बनाने की विधि

पत्ता गोभी की सब्ज़ी बनाने की विधि


सामग्री:


पत्ता गोभी – 1 मध्यम आकार (बारीक कटी हुई)


आलू – 1–2 (क्यूब्स में कटे हुए, वैकल्पिक)


हरी मिर्च – 2 (कटी हुई)


अदरक – 1 छोटा टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)


हल्दी – ½ चम्मच


लाल मिर्च पाउडर – ½ चम्मच


धनिया पाउडर – 1 चम्मच


जीरा – ½ चम्मच


सरसों के दाने (वैकल्पिक) – ½ चम्मच


नमक – स्वादानुसार


तेल – 2 बड़े चम्मच


हरा धनिया – थोड़ा सा (कटा हुआ)




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विधि (Method):


1. सबसे पहले पत्ता गोभी को अच्छी तरह धोकर बारीक काट लें।



2. कड़ाही में तेल गर्म करें।



3. तेल गरम होने पर जीरा और सरसों के दाने डालें।



4. अब हरी मिर्च और कद्दूकस किया हुआ अदरक डालकर हल्का सा भूनें।



5. यदि आलू डाल रहे हों तो अब कटे हुए आलू डालें और 2–3 मिनट भूनें।



6. अब हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर डालकर मसालों को भूनें।



7. इसके बाद कटी हुई पत्ता गोभी डालें और अच्छी तरह मिलाएँ।



8. स्वादानुसार नमक डालें और ढककर 10–12 मिनट मध्यम आँच पर पकाएँ।



9. बीच-बीच में करछी से चलाते रहें ताकि सब्ज़ी जले नहीं।



10. जब पत्ता गोभी और आलू दोनों अच्छी तरह मुलायम हो जाएँ, गैस बंद कर दें।



11. ऊपर से हरा धनिया डालकर मिक्स करें।





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तैयार है स्वादिष्ट पत्ता गोभी की सब्ज़ी!


इसे रोटी, पराठा या दाल-चावल के साथ गरमा-गरम परोसें।

-सोनू मीणा

बुधवार, 28 मई 2025

भारत गुलाम क्यों बना

 Bharat gulam isliye bana kyunki yahaan ke shasan vyavastha mein kamjoriyan thi, aur videshi akramankariyon ne in kamjoriyon ka fayda uthaya.


Bharat mein kai sadion tak chhote-chhote rajya the, jo apas mein ladte rehte the. Isse videshi akramankariyon ko Bharat par kabza karne ka mauka mila.


Angrezon ne Bharat par kabza karne ke liye kai ranneetiyan apnayi, jinmein se kuch pramukh ranneetiyan is prakaar hain:


1. *Divide and Rule*: Angrezon ne Bharat ke alag-alag samudayon aur dharmik samudayon ko apas mein ladaya, aur apna kabza banaye rakha.

2. *Aarthik Shoshan*: Angrezon ne Bharat ke sansadhanon ka shoshan kiya, aur Bharat ko aarthik roop se kamjor banaya.

3. *Sainik Shakti*: Angrezon ne Bharat mein apni sainik shakti ko majboot kiya, aur Bharat ke shasakon ko haraya.


In ranneetiyon ke karan, Angrezon ne Bharat par lagbhag 200 varsh tak raj kiya, aur Bharat ko gulam banaye rakha.

गीता उपदेश

 गीता का उपदेश:


"हे अर्जुन, जीवन एक युद्ध है, जिसमें तुम्हें अपने मन के विकारों से लड़ना होगा। लेकिन घबराओ नहीं, क्योंकि तुम्हारे अंदर एक शक्तिशाली आत्मा है।


"कर्म करो, फल की चिंता मत करो। अपने कर्तव्य को पूरा करो, और परिणाम भगवान पर छोड़ दो।


"जो होता है, अच्छे के लिए होता है। इसलिए, शांत रहो, और अपने मार्ग पर चलते रहो।


"तुम्हारी असली पहचान तुम्हारा शरीर नहीं, बल्कि तुम्हारी आत्मा है। इसलिए, अपने आत्मा को पहचानो, और उसके अनुसार जीओ।


"याद रखो, भगवान हमेशा तुम्हारे साथ हैं। बस, अपने मन को शांत रखो, और उनकी आवाज सुनो।"


*नैतिकता:* जीवन में कर्म, शांति, और आत्म-ज्ञान के मार्ग पर चलने से ही सच्ची शांति और सफलता मिलती है।

गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021

स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही

 मधुबनी जिले के अस्पतालों में

स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और मरीजों का आर्थिक दोहन

 ...........प्रदीप कुमार नायक

..........स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार




             बेहतर चिकित्सा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।लेकिन सच्चाई बिल्कुल विपरीत नज़र आते हैं।मधुबनी सदर अस्पताल में मरीजों का रेला मगर यहां भी हर रोग का डॉक्टर नहीं हैं।यहां हर तरह की जांच उपलब्ध नहीं हैं।यही कारण हैं कि सरकारी इलाज की व्यवस्था लड़खड़ाते और प्राइवेट वाले दौड़ रहे हैं।पेयजल का भी यहां घोर अभाव महसूस की जा रही हैं।मरीजों की परेशानी की बाबत पूछने पर चिकित्सको का रटा-रटाया जवाब कि सीमित संसाधनों में बेहतर इलाज का प्रयास चल रहा हैं।

                मधुबनी सदर अस्पताल सहित जिले के राजनगर,खजौली, जयनगर,बेनीपट्टी, बासोपट्टी, झंझारपुर, लौकहा,अंधराठाढ़ी, बाबूबरही, खुटौना का सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं।मगर अस्पतालों में डॉक्टरों और बेड़ों की संख्या नही बढ़ाई जा रही हैं।इतना ही नही इन सरकारी अस्पतालों में सरकार की ओर से घोषित दवाईयां भी उपलब्ध नही हैं।मरीजों को पुर्जा थमाकर बाहर से खरीदकर ईलाज के लिए दवाई लाने को कहना आम बात हैं।साधारण बीमारी वाले मरीजों को भी तुरंत रेफर कर दिया जाता हैं।मधुबनी जिला सहित पूरे राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उलट गई हैं।गरीब लोग बिना इलाज कराए मौत को गले लगाने को विवश हैं और सरकार चैन की बंशी बजा रही हैं।

               राज्य सरकार लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना चाहती हैं।देश के बड़े राजयो में बिहार सरकार स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च करती हैं।बजट में महज तीन फीसद ही स्वास्थ्य की हिस्सेदारी हैं।नेशनल हेल्थ प्रोफाइल की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति सालाना खर्च महज 431 रुपये हैं।राष्ट्रीय औसत एक हजार 112 रुपये हैं।पड़ोसी राज्य झारखंड बिहार से अधिक राशि खर्च करता हैं।झारखंड में एक साल में प्रत्येक व्यक्ति पर 716 रुपये खर्च किए जाते हैं।

                 विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए।मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मानक के तहत 1681 व्यक्ति पर एक डॉक्टर होना चाहिए,बिहार में 17,685 की आबादी पर एक ही डॉक्टर उपलब्ध हैं।मानक के हिसाब से प्रदेश में ग्यारह करोड़ की आबादी  के लिए 65 हजार 437 डॉक्टरों की जरूरत हैं।इसके विपरीत सरकारी अस्पतालों में करीब 30 से 32 हजार डॉक्टर कार्यरत हैं।25 हजार प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं।सामान्य स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के तहत जनरल मेडिकल ऑफिसरों के कुल 57777 पद स्वीकृत हैं।जबकि 4053 डॉक्टर ही कार्यरत हैं।इस तरह 1724 पद रिक्त हैं।विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत पद 2775 हैं।जिसमें 782 लोग पद स्थापित हैं।नौ सरकारी मेडिकल अस्पतालों में 1654 चिकित्सक शिक्षक कार्यरत हैं।इसमें 168 प्रोफेसर,244 एसोसिएट प्रोफेसर,615 असिस्टेंट प्रोफेसर,217 ट्यूटर और 410 सीनियर रेजिडेंट कार्यरत हैं।बिहार मेडिकल रजिस्ट्रेशन काउंसिल में निबंधित डॉक्टरों की संख्या 55 हजार के करीब हैं।इसमें वैसे डॉक्टर भी शामिल हैं,जिनकी मृत्यु हो चुकी हैं।कई निबंधित चिकित्सक विदेश या दूसरे राज्य में चले गए हैं।

                डॉक्टर, नर्स और पैरा मेडिकल स्टॉफ की कमी की वजह से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में स्वास्थ्य मानक का अनुपालन नहीं हो रहा हैं।कई अस्पताल में स्वास्थ्य मानक का अनुपालन नहीं हो रहा हैं।कई अस्पताल एक-दो डॉक्टर के दम पर चल रहे हैं।कई जिले में एक सरकारी डॉक्टर पर हजार मरीजों को ईलाज करने की जिम्मेदारी हैं।डॉक्टरों की कमी के चलते सातों दिन चौबीस घंटे ईलाज की व्यवस्था करने की योजना गति नही पकड़ पा रही हैं।ए ग्रेड नर्स के 4,704 स्वीकृत पद के विरुद्ध 2,096 ही कार्यरत हैं।इसी तरह से संविदा पर 2,500 स्वीकृत पद हैं।जबकि 168 ही कार्यरत हैं।ए एन एम के 21,859 स्वीकृत पद हैं।जबकि 12,134 कार्यरत हैं।संविदा पर 12,659 पद के विरुद्ध 5,758 ही काम कर रही हैं।

                  राज्य सरकार द्वारा सरकारी अस्पताल में मरीजों को नि:शुक्ल दवाएं मुहैया कराई जाती हैं।मधुमेह, कैंसर,ह्रदय समेत कई जीवन रक्षक दवाओं को भी इसमें शामिल की गई हैं।सरकारी अस्पतालों में 310 प्रकार की दवाएं नि:शुक्ल उपलब्ध कराने का दावा किया गया।जबकि मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में पहले 181 प्रकार की दवाएं मिलती थी,जो बढ़कर 225 हो गई हैं।जिला अस्पतालों में दवा 123 से बढ़कर 167 हो गई हैं।स्वास्थ्य विभाग के दावा के बावजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल को पूरी दवाईयां कभी नहीं उपलब्ध कराई गई।अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर मरीजों को बाहर से दवा खरीद लेने की।सलाह दी जाती हैं।

                    मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं शहरी अस्पतालों पर बोझ कम करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ,सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल में गंभीर बीमारी का इलाज एवं जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना था।इसकी शुरुआत काफी जोर शोर से की गई,मगर साकार नहीं हो सका।विशेषज्ञों की कमी ,जांच उपकरण के अभाव के कारण मरीजों को शहर की ओर रुख करना पड़ता हैं।ह्रदय, कैंसर, किडनी एवं यूरोलॉजी रोग इलाज कराने के लिए मरीजों के सामने दरभंगा एवं पटना के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं हैं।

               केन्द्र सरकार देश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए हर साल मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ाने,एम बी बी एस एवं पी जी की सीटें बढ़ा रही हैं।लेकिन इसका लाभ बिहार नही उठा पा रहा हैं।इसकी सबसे बड़ी वजह चिकित्सक शिक्षकों की कमी हैं।शिक्षकों की कमी के कारण कॉलेजों में सीटें तो नही बढ़ाई जा रही हैं।बल्कि सिटें कम होने का खतरा मंडराता रहता हैं।नए-नए विषयों में पढ़ाई की योजना भी साकार नही हो पा रही हैं।

                 इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड ने आबादी के अनुरूप अस्पतालों की स्थापना की अनुशंसा की हैं।प्रति पांच हजार की आबादी पर एक स्वास्थ्य उप केन्द्र होना चाहिए।प्रदेश में 9,696 स्वास्थ्य उप केन्द्र हैं।मानकों के अनुसार 20 हजार स्वास्थ्य उप केन्द्र होना चाहिए।इसी तरह 30 हजार की आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र होना चाहिए।जबकि 533 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ही संचालित हो रहें हैं।मानकों के। मुताबिक 3,666 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की आवश्यकता हैं।इसी तरह पचास लाख की आबादी पर एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल होना चाहिए।इस हिसाब से राज्य में 21 से 22 मेडिकल कॉलेज होना चाहिए।जबकि राज्य में नौ सरकारी मेडिकल एवं तीन तीन निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हैं।

                     मालूम हो कि जेनरिक दवाईयां ब्रांडेड या फार्मा की दवाईयां के मुकाबले सस्ती होती हैं।जबकि प्रभावशाली उनके बराबर ही होती हैं।इस योजना के अनुसार यह भी सुनिश्चित करना हैं कि सरकारी अस्पतालों एवं प्राइवेट क्लिनिक के डॉक्टर अपने प्रेस्किप्शन पर जेनरिक दवाईयां ही लिखे।साथ ही साथ डॉक्टर के लिखावट सुस्पष्ट होना चाहिए।जिससे कि कोई भी मेडिसिन दुकानदार उसे पढ़ सके और दवाईयां दे सके।आमतौर पर डॉक्टर अपने पर्ची में ऐसी भाषा में अस्पष्ट लिखावट में दवाईयों के नाम लिखते हैं,जो उन्हीं के पास के मेडिकल दुकानदार पढ़ते हैं।इस तरह डॉक्टर को दोहरा धंधा हो जाता हैं।अक्सर देखा जाता हैं कि डॉक्टर अपने आसपास ही पैथोलॉजिकल जांच से लेकर मेडिसिन की दुकान तक अपने ही क्लिनिक में खोल देते हैं और दवा  के क्षेत्र में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रही कंपनियों की दवा अपने पर्ची पर लिखते हैं,जो वही आसपास के दुकानों पर मिलता हैं।जिसमें बिक्री के हिसाब से डॉक्टरों को मोटा कमीशन मिलता हैं।

                 सदर अस्पताल मधुबनी जिले का सबसे बड़ा अस्पताल हैं,जहां से यह अपेक्षा रहती हैं कि रोगियों के लिए आवश्यकता की प्रायः सभी सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं हैं।एक तरफ सूबे की सरकार आम जनता के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की डंका पिटती हैं और दूसरी ओर मरीजों का आर्थिक दोहन हो रहा हैं।कोई भी सरकार सरकारी अस्पताल की कुव्यवस्था एवं अव्यवस्था नहीं सुधार पाई।कारण किसी सरकार ने स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दें को गंभीरता से नहीं लिया।यदि लिया होता तो सदर अस्पताल सहित जिले की तमाम अस्पताल की यह दुर्दशा तो नहीं होती,जो अभी वर्तमान में हैं।

                  अस्पताल में डॉक्टर के समय से न आने और गायब रहने की शिकायत आम हैं।सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा का अभाव,दवाओं की किल्लत,डॉक्टर और चिकित्साकर्मियों की कमी की समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं।इसके चलते ग्रामीण एवं सुदूर इलाके के लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने की सरकार की योजना पर सवाल खड़ा कर देता हैं।जिले में अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही की खबरें आती हैं।सूबे के बड़ा वर्ग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आश्रित हैं।ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार बहुत जरूरी हैं।

        लेखक - स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्र एवं चैनलों में अपनी योगदान दे रहें हैं।

        मोबाइल - 8051650610

शनिवार, 2 अक्टूबर 2021

स्वच्छता अभियान

 : राम प्रसाद राउत ने चलाया स्वच्छता अभियान

                 प्रदीप कुमार नायक

             स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार





         गांधी जयंती  दिनांक-02 अक्टूबर 2021 के अवसर पर को जयनगर स्पोर्ट्स कमिटी जिला- मधुबनी के नौजवानों एवं खिलाड़ियों के द्वारा सुबह 7:00 बजे से जयनगर अनुमंडलीय अस्पताल में कमेटी के अध्यक्ष श्री राम प्रसाद राऊत जी के नेतृत्व में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर स्वच्छता अभियान चलाया गया i*

               जयनगर अनुमंडलीय अस्पताल में गंदगी का अंबार है स्वच्छता के दृष्टिकोण से पूरे परिसर को सफाई एवं सौंदर्यीकरण की आवश्यकता है i

        *जयनगर स्पोर्ट्स कमिटी के अध्यक्ष श्री राम प्रसाद राऊत ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा है कि भारत के महान व्यक्ति राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि स्वतंत्रता से ज्यादा स्वच्छता कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, भारत गरीबी, शिक्षा की कमी, स्वच्छता की कमी और अन्य सामाजिक मुद्दों के कारण आज भी विकासशील देश है हमें समाज से उन सभी कारणों का उन्मूलन करने की आवश्यकता है* i 

          श्री राऊत ने कहा है कि जयनगर स्पोर्ट्स कमिटी का मुख्य उद्देश्य है कि *जयनगर हाईस्कूल मैदान को अतिक्रमण मुक्त करवाते हुए सौंदर्यीकरण एवं जयनगर शहर को भी कचरा से मुक्त करने का उद्देश्य है* उसी उद्देश्य के तहत आज जयनगर स्पोर्ट्स कमेटी के श्री विवेक कुमार सिंह, श्री सुजीत उर्फ सोनू हंस, श्री बसंत कुमार मेहरा, श्री पंकज कुमार मेहरा, श्री मुकेश कुमार, श्री रोशन कुमार, श्री पवन सिंह, श्री नारायण पासवान, मोहम्मद गुलजार, श्री सुरेश पासवान, श्री दिनेश पासवान, श्री गणेश कामत, श्री शुभम कुमार, श्री ऋषि कांत प्रसाद, श्री मोहन सिंह, श्री आशीष सिंह, श्री दिनेश सिंह, कृष्ण कुमार, प्रिंस कुमार इत्यादि खिलाड़ियों के द्वारा जयनगर अनुमंडलीय अस्पताल में स्वच्छता अभियान चलाया गया जो बहुत ही सराहनीय एवं प्रशंसनीय कार्य है i 

         *एक स्वर से उपस्थित सभी खिलाड़ियों ने प्रत्येक सोमवार को* सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक स्वच्छता अभियान चलाने का भी संकल्प लिया है iकमिटी के अध्यक्ष राम प्रसाद राउत ने अपनी बुलंद आवाज में कहां की 


*एक नया सवेरा लाएंगे पूरे जयनगर को स्वच्छ* 

                     *और सुंदर बनाएंगे*।

शनिवार, 11 सितंबर 2021

सुनार हॉल मार्किंग यूनिक आई डी (HUID) से क्यो डरता है?*

 *सुनार हॉल मार्किंग यूनिक आई डी (HUID) से क्यो डरता है?*

    


           प्रदीप कुमार नायक

            स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार

मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने *10 ग्राम प्योर सोना 50000 रुपये का खरीदा।* 

उस सोने को लेकर आप सुनार के पास हार बनवाने गए। सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनवाई लगेगी। 

आपने *खुशी* से कहा ठीक है। उसके बाद सुनार ने *1 ग्राम सोना निकाल लिया* और 1 ग्राम का *टांका* लगा दिया। क्योंकि बिना टांके के आपका हार बन ही नहीं सकता। 


*यानी की 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया* और 2000 रुपये आपसे *बनवाई अलग से* लेली। 


यानी आपको *5000 रुपये का झटका* लग गया। अब आपके *50 हजार* रुपये सोने की कीमत मात्र *45 हजार* रुपये बची और सोना भी *1 ग्राम कम कम हो कर 9 ग्राम शेष बचा ।*  


बात यहीं खत्म नही हुई। उसके बाद *अगर* आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या कोई और आभूषण बनवाने पुन: उसी सुनार के पास जाते हैं तो वह पहले टांका काटने की बात करता है और सफाई करने के नाम पर *0.5 ग्राम सोना* और कम हो जाता है। 


अब आपके पास मात्र *8.5 ग्राम* सोना ही बचता है। यानी की *50 हजार* का सोना मात्र *43500* रुपये का बचा।


आप जानते होंगे कि,


*50000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनवाई 52000 रुपये ।*


*1 ग्राम का टांका कटा 3000 रुपए + 0.5 ग्राम पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा मतलब सफाई के नाम पर = 1500/=*


*शेष बचा सोना 8.5 ग्राम*


*यानी कीमत 52000 - 6500 का घाटा  .....= 45500 रुपये*


*भारत सरकार की मंशा क्या है ?*


*HUID* लगने पर सुनार को रसीद के आधार पर उपभोक्ता को पूरा सोना देना होगा। 

और जितने ग्राम का टांका लगेगा उसका *सोने के तोल* पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जैसा कि आपके सोने की तोल *10 ग्राम* है और टाका *1 ग्राम* का लगा तो सुनार को रसीद के आधार पर *11 ग्राम* वजन करके उपभोक्ता को देना होगा। इसीलिए सुनार हड़ताल पर है कि अब उनका *धोखाधड़ी* का *भेद* खुल जायेगा।

*HUID वाली ज्वेलरी* को सोने के मार्किट भाव से ज्यादा बेचने और मिलावट करने पर सुनार को अपनी ज्वेलरी ताजे सोने के मार्किट भाव वापस खरीदनी पड़ेगी। यानी खुद का लड्डू खुद खाना पड़ेगा। ग्राहक HUID वाली ज्वेलरी किसी भी सुनार को बेच सकता है, जिसे कोई भी सुनार मना नहीं कर सकता। यानी एक सुनार दूसरे सुनार के पापो का फल भोगेगा।

शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

प्याज और लहसुन पाप को बढ़ाता है

 प्याज और लहसुन पाप को बढ़ाता हैं

               


  

 प्रदीप कुमार नायक

               स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार


*देवताओं को प्याज और लहसुन का भोग क्यों नही लगाया जाता? क्यों प्याज और लहसुन को शाकाहार नही माना जाता ? क्या यह राक्षसी भोजन है? आओ ! इस संबंध में एक धार्मिक कहानी का आनंद लें।* 

*"बात समुद्र मंथन के समय की है। समुद्र मंथन से जब अमृत निकला तो अमृत पीने के लिए देवताओं व राक्षसों में छीना-झपटी होने लगी। तब मोहिनी रूप धर भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृतपान कराने के उद्देश्य से राक्षसों को भ्रमित कर अमृत बांटना शुरू कर दिया। राहु नामक एक राक्षस को मोहिनी पर जब संदेह हुआ तो वह चुपके देवताओं की पंक्ति में भेष बदल कर बैठ गया। अमृत बांटते बांटते मोहिनी के रूप में भगवान विष्णु भी उस राक्षस को नही पहिचान पाये और उसे भी अमृत दे दिया। परंतु तत्काल सूर्य और चंद्र के पहचानने पर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उस राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर कटते ही अमृत की कुछ बूंदें उस राक्षस के मुंह से रक्त के साथ नीचे जमीन में गिरी, जिनसे प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई। अमृत से पैदा होने के कारण प्याज और लहसुन रोगनाशक व जीवनदायिनी है। परंतु राक्षसी रक्त के मिश्रण के कारण इसमें राक्षसी गुणों का समावेश हो गया है। इनके सेवन से शरीर राक्षसों की तरह बलिष्ठ होता है। ये उत्तेजना, क्रोध, हिंसा अशांति व पाप में वृद्धि करते है। इसलिए इसे राक्षसी भोजन माना गया है। रोगनाशक व जीवनदायिनी होने के बाद भी यह पाप को बढ़ाता है और बुद्धि को भ्रष्ट कर अशांति को जन्म देता है। इसलिए प्याज और लहसुन को अपवित्र मान कर इनका धार्मिक कार्यों में प्रयोग वर्जित है तथा देवी-देवताओं को इनका भोग नही लगाया जाता।

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पत्ता गोभी की सब्ज़ी बनाने की विधि

पत्ता गोभी की सब्ज़ी बनाने की विधि सामग्री: पत्ता गोभी – 1 मध्यम आकार (बारीक कटी हुई) आलू – 1–2 (क्यूब्स में कटे हुए, वैकल्पिक) हरी मिर्च – ...